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दुमका मँ खोजलौ गेलौ जीवाश्म-चट्टान, सभ्यता केरौ विकास के रहस्यो क खोजै मँ मदद करतै : बादल पत्रलेख, कृषि मंत्री, झारखंड | Angika Language News

Fossil rocks discovered in Dumka, Anga Pradesh, will help in uncovering the mysteries of development of Civilizations : Badal Patralekh, Agriculture Minister, Jharkhand. 

Eminent archaeologist Pandit Anoop Kumar Bajpai, who discovered the fossil of a giant fish contained in the rock of Mahabala mountain valley of Barmasia under Jarmundi block of Dumka district of Ang Pradesh region of eastern India, has told it to be more than 300 million years old.

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ANGIKA LANGUAGE VERSION

दुमका 26 अक्टूबर, 2023 । 

लुक्खी, हरिण केरौ खुर, मछली, आदिमानव आरू पंछी सिनी सहित बहुत्ते सिनी जानवरौ आरनि के जीवाश्म के रूप मँ मौजूद चट्टान सब झारखंड पर्यटन विभाग केरौ संज्ञान मँ लानलो गेलो छै

 

झारखंड केरौ कृषि मंत्री बादल पत्रलेख कहलै छै कि पर्यटको आकर्षित करै लेली अंग-प्रदेश केरौ दुमका जिला के बरमसिया गांव मँ पंछियो आरू जानवरो के जीवाश्म वाला एगो विशाल चट्टान केरौ सुरक्षा लेली कदम उठैलौ जैतै।

 

हुनी गुरुवार कहलकै, लुक्खी, हरिण केरौ खुर, मछली, आदिमानव आरू पंछी सिनी सहित बहुत्ते सिनी जानवरौ आरनि के जीवाश्म के रूप मँ मौजूद चट्टान सब झारखंड पर्यटन विभाग केरौ संज्ञान मँ लानलो गेलो छै

 

कृषि मंत्री बादल पत्रलेख नँ कहलकै कि अंगप्रदेश केरौ दुमका मँ खोज करलौ गेलौ जीवाश्म-चट्टान सभ्यता केरौ विकास के रहस्यो खोजै मँ मदद करतै।

 

हुनी कहलकै कि जीवाश्म-चट्टान केरौ सुरक्षा आरू पार्क आरनि के निर्माण लेली पर्यटन विभाग पत्र लिखलौ जाय रहलौ छै मंत्री नँ कहलकै, “ जीवाश्म-चट्टान केरौ सुरक्षा,संरक्षण आरू क्षेत्र केरौ विकास लेली हम्में दृढ़ संकल्पित छियै।

 

दुमका स्थित वरिष्ठ पुरातत्वविद आरू लेखक पंडित अनूप कुमार वाजपेयी नँ एक दशक पहलें जीवाश्म-चट्टान शोध आरूर खोज करलै छेलै आरू हुनको शोध कार्य "दुमका जिला केरौ धार्मिक-संस्कृतिक-पुरातात्विक झलक" जे कि 3 अक्टूबर जारी करलो गेलो छेलै।


Pandit Anup Kumar Bajpai (In Red Dress) with Badal Patralekh, Agriculture Minister, Jharkhand and others
Pandit Anup Kumar Bajpai (In Red Dress) with Badal Patralekh, Agriculture Minister, Jharkhand and other officials

 

पर्यटन विभाग लिखलो पत्र मँ, दुमका जिला प्रशासन नँ जनकपुर जीवाश्म चट्टान सहित जिला केरौ कै ठेरै पर्यटन स्थलो सब पर्यटक स्थल आरू क्षेत्र केरौ प्रचार के रूप मँ चिह्नित करलै छै।


इ संबंध मँ एकरो पहिने नवंबर-२०२२ मँ अंगिका.कॉम नँ समाचार प्रकाशित करी क सर्वप्रथम ई जानकारी देने रहै कि झारखंड राज्य केरो दुमका मँ 30 करोड़ साल सँ भी पुरानो एगो विशालकाय मछली केरो जीवाश्म केरो खोज करलो गेलो छै । पूर्वी भारत केरो प्रसिद्ध पुरात्तवविद् पंडित अनूप कुमार वाजपेयी नँ गत 22 नवंबर 2022 क जानकारी साझा करतें बतैलै छेलै कि हुनी दुमका जिला केरो जरमुंडी प्रखंड अंतर्गत बरमसिया केरो महाबला पहाड़ केरो घाटी स्थित एगो चट्टान मँ समाहित मछली केरो ई जीवाश्म केरो खोज लगभग १० साल पहलें करलै छै । झारखंड सरकार केरो संज्ञान मँ ऐला के बाद, ई जीवाश्म आरू स्थल केरो प्राचीनता आरू ऐतिहासिकता के महत्व क समझतें हुअय एकरो संरक्षण आरू एकरा पर्यटन स्थल के रूप मँ विकसित करै लेली झारखंड सरकार केरो संबंधित विभाग सिनी तुरंत प्रभाव सँ सक्रिय होय गेलो छै ।

Archeologist, Pandit Anoop Kumar Bajpai posed with  his recent discovery of Fossil of 300 million years old giant fish
Archeologist, Pandit Anoop Kumar Bajpai posed with  his recent discovery of Fossil of 300 million years old giant fish |

पुरातत्वविद्पंडित अनूप कुमार वाजपेयी, आपनो खोज 30 करोड़ वर्ष पुरानो विशाल मछली के जीवाश्म सथें

पूर्वी भारत केरो अंग प्रदेश क्षेत्र के दुमका जिला केरो जरमुंडी प्रखंड अंतर्गत बरमसिया केरो महाबला पहाड़ केरो घाटी के चट्टान मँ समाहित विशालकाय मछळी केरो ई जीवाश्म के खोज करै वाला प्रसिद्ध पुरात्तवविद् पंडित अनूप कुमार वाजपेयी नँ एकरा 30 करोड़ साल सँ भी जादा पुरानो बतलैले छै ।

 

अंगिका डॉट कॉम केरो कुंदन अमिताभ सँ बातचीत के क्रम मँ पुरात्तवविद् पंडित अनूप कुमार वाजपेयी नँ बतैलकै कि बरमसिया मँ मिललो ई जीवाश्म चट्टान सँ सट्टी क घघाजोर नाम के एगो पातरो रकम के नद्दी बहै छै । ई लेली ई जीवाश्म चट्टान, घघाजोर चट्टान के नाँव सँ जानलो जाय छै ।

 

ई सर्वविदित छै कि पुरात्तवविद् पंडित अनूप कुमार वाजपेयी नँ पहिने भी यहे क्षेत्र मँ चट्टान मँ जीवाश्म के रूप मँ समाहित लुक्खी (गिलहरी), हिरण केरो खुर, प्राचीन मानव केरो पदछाप आरनि के खोज करी चुकलो छै । हुनको ई महत्वपूर्ण खोज के बारे मँ झारखंड सरकार भी अवगत छै ।

 

पुरात्तवविद् पंडित अनूप कुमार वाजपेयी नँ कहलकै कि भूगोल आरू भूगर्भशास्त्र केरो किताब सिनी मँ स्थापित मान्यता के अनुसार संतालपरगना केरो पहाड़ी सिनी राजमहल केरो पहाड़ी के नाँव सँ जानलो जाय छै । जेकरा सथें पहिने कहिय्यो अफ्रीका केरो पहाड़ सटलो छेलै । तखनी धरती केरो स्थलीय भाग बहुत छोटो छेलै । जर्मन भूविज्ञानी अल्फ्रेड वेगेनर केरो अनुसार 30 करोड़ साल पहिने अफ्रीका केरो पहाड़, राजमहल केरो पहाड़ी सँ दूर होय गेलै । ई लेली आय भी राजमहल आरू अफ्रीका केरो पहाड़ सिनी मँ मिलै वाला वनस्पति सब के जीवाश्म केरो प्रकृति एक रकम पैलो जाय छै । 

 

श्री बाजपेयी के अनुसार अंग प्रदेश क्षेत्र केरो ई सब स्थल के जों संरक्षण करलो जाय त सौंसे दुनिया सँ शोधकर्ता आरू पर्यटक यहाँ आबै सकै छै । कैन्हेंकि ई स्थल धरती प जीवो के क्रमिक विकास प प्रकाश डालै छै । ऐन्जाँ ई उल्लेखनीय छै कि पंडित अनूप कुमार वाजपेयी पुरातत्वविद् मँ महत्वपूर्ण मुकाम हासिल करी क ई क्षेत्र मँ पहिने भी वनस्पति आरू जीव-जंतु सिनी केरो जीवाश्म के खोज करी चुकलो छै ।


HINDI LANGUAGE VERSION

अंग प्रदेश के दुमका में खोजे गए जीवाश्म चट्टानों से सभ्यताओं के विकास के रहस्यों को उजागर करने में मदद मिलेगी: बादल पत्रलेख, कृषि मंत्री, झारखंड

दुमका 26 अक्टूबर, 2023 । 

गिलहरी, हिरण के खुर, मछली, आदिमानव आदि जैसे कई जानवरों और पक्षियों से युक्त जीवाश्म चट्टान को झारखंड पर्यटन विभाग के संज्ञान में लाया गया है।

झारखंड के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा है कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए दुमका जिले के बरमसिया गांव में पक्षियों और जानवरों के जीवाश्म वाली एक विशाल चट्टान की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने गुरुवार को कहा, गिलहरी, हिरण के खुर, मछली, आदिमानव आदि कई जानवरों और पक्षियों के जीवाश्म रूप में मौजूद इस चट्टान को पर्यटन विभाग के संज्ञान में लाया गया है। मंत्री ने कहा कि जीवाश्म चट्टान सभ्यता के विकास के रहस्यों को खोजने में मदद करेगी।

चट्टान की सुरक्षा और पार्क आदि के निर्माण के लिए पर्यटन विभाग को पत्र लिखा जा रहा है । मंत्री ने कहा, “मैं इस जीवाश्म चट्टान की सुरक्षा और संरक्षण और क्षेत्र के विकास के लिए दृढ़ संकल्पित हूं।”

दुमका स्थित लेखक पंडित अनूप कुमार वाजपेयी ने एक दशक पहले जीवाश्म चट्टान पर शोध और खोज की थी और उन्होंने शोध कार्य पर "दुमका जिले की धार्मिक-संस्कृतिक-पुरातत्विक झलक" (दुमका जिले की महत्वपूर्ण धार्मिक, सांस्कृतिक पुरातत्विक झलक) नामक एक पुस्तक भी लिखी थी, जो 3 अक्टूबर को जारी किया गया था।

इस संबंध में इसके पूर्व नवंबर-२०२२ में अंगिका.कॉम ने समाचार प्रकाशित कर सर्वप्रथम यह जानकारी दी थी कि झारखंड राज्य के दुमका में 30 करोड़ साल से भी पुराना एक विशालकाय मछली का जीवाश्म खोजा गया है । पूर्वी भारत के प्रसिद्ध पुरात्तवविद् पंडित अनूप कुमार बाजपेयी ने गत 22 नवंबर 2022 को जानकारी साझा करते बताया ता कि उन्होंने दुमका जिला के जरमुंडी प्रखंड अंतर्गत बरमसिया के महाबला पहाड़ की घाटी में स्थित एक चट्टान में समाहित विशालकाय मछली के जीवाश्म की खोज लगभग १० साल पहले की है। झारखंड सरकार के संज्ञान में आने के बाद, इस जीवाश्म और स्थल की प्राचीनता और ऐतिहासिकता के महत्व के मद्देनजर इनके संरक्षण और इनके पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने हेतु झारखंड सरकार के संबंधित विभाग तुरंत प्रभाव से सक्रिय हो गए हैं ।

पूर्वी भारत के अंग प्रदेश क्षेत्र के दुमका जिला के जरमुंडी प्रखंड अंतर्गत बरमसिया के महाबला पहाड़ की घाटी के चट्टान में समाहित विशालकाय मछली के इस जीवाश्म की खोज करने वाले प्रसिद्ध पुरात्तवविद् पंडित अनूप कुमार बाजपेयी ने इसे 30 करोड़ साल से भी ज्यादा पुराना बताया है ।

 

अंगिका डॉट कॉम के कुंदन अमिताभ से बातचीत के क्रम में पुरात्तवविद् श्री बाजपेयी ने बताया कि बरमसिया में मिला इस जीवाश्म चट्टान से सटकर घघाजोर नाम की एक पतली सी नदी बहती है । इसलिए इस जीवाश्म चट्टान को घघाजोर चट्टान के नाम से भी जाना जाता है ।

 

यह सर्वविदित है कि पुरात्तवविद् पंडित अनूप कुमार बाजपेयी ने पहले भी इस क्षेत्र के चट्टानों में जीवाश्मों के रूप में समाहित गिलहरी, हिरण के खुर, प्राचीन मानव के पदछाप आदि की खोज करी चुके हैं । उनके इन महत्वपूर्ण खोजों के बारे में झारखंड सरकार भी अवगत है ।

 

पुरात्तवविद् पंडित अनूप कुमार बाजपेयी ने बताया कि भूगोल और भूगर्भशास्त्र की किताबों में स्थापित मान्यता के अनुसार संतालपरगना की पहाड़ियाँ, राजमहल की पहाड़ी के नाम से जाने जाते हैं । इन पहाडियों के साथ पहले कभी अफ्रीका के पहाड़ सटे होते थे । तब धरती के स्थलीय भाग बहुत छोटे होते थे । जर्मन भूविज्ञानी अल्फ्रेड वेगेनर के अनुसार 30 करोड़ साल पहले अफ्रीका के पहाड़, राजमहल की पहाड़ी से दूर हो गए । इसलिए आज भी राजमहल और अफ्रीका की पहाड़ियों में मिलने वाले वनस्पतियों के जीवाश्म की प्रकृति एक सदृश पाई जाती है ।


श्री बाजपेयी के अनुसार अंग प्रदेश क्षेत्र के इन सब स्थलो को अगर संरक्षित कर पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किये जाएँ तो पूरी दुनिया से शोधकर्ता और पर्यटक यहाँ आ सकेंगे । क्योंकि इन स्थलों पर धरती के जीवों के क्रमिक विकास के चिन्हों के अवशेष देखने को मिलते हैं । उल्लेखनीय है कि पंडित अनूप कुमार बाजपेयी पुरातत्वविद् में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर इस क्षेत्र में पूर्व में भी वनस्पतियों और जीव-जंतु सब के जीवाश्मों की खोज कर चुके हैं ।

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ENGLISH LANGUAGE VERSION

Fossil rocks discovered in Dumka, Anga Pradesh, will help in uncovering mysteries of development of civilizations: Badal Patralekh, Agriculture Minister, Jharkhand

Dumka October 26, 2023 

The fossil rock containing many animals and birds such as squirrels, hoofs of deer, fish, primitive man, etc has been brought to Jharkhand Tourism dept's notice.


Jharkhand Agriculture Minister Badal Patralekh has said that steps will be taken to protect a huge rock in Dumka district's Barmasia village containing fossils of birds and animals to attract tourists.


This rock containing many animals and birds such as squirrels, hoofs of deer, fish, primitive man, etc in the fossil form has been brought to the notice of the Tourism department, he said on Thursday.


The minister said the fossil rock would help discover the mysteries about the development of the civilisation. A letter is being written to the Tourism department for the protection of the rock and construction of a park, etc, the minister said, adding that "I am determined for the protection and preservation of this fossil rock and the development of the area.


A Dumka-based author Pandit Anoop Kumar Vajpayee had researched and discovered the fossil rock over a decade ago and also authored a book on the research work titled "Dumka Zille ki Dharmik-Sanskritik-Puratatwik Jhalak" (Glimpses of Dumka district's important Religious, Cultural, Archaeological sites", which was released on October 3.


In a letter to the Tourism department, the Dumka district administration has identified many tourist spots in the district including Janakpur fossil rock as tourist spot and promotion of the area.


In this regard, earlier in November 2022, Angika.com had published the news and first informed that a fossil of a giant fish more than 300 million years old has been discovered in Dumka of Jharkhand state. Pandit Anup Kumar Bajpayee, a famous archaeologist of Eastern India, while sharing information on 22nd November 2022, said that he discovered the fossil of a giant fish embedded in a rock located in the valley of Mahabala mountain of Barmasia under Jarmundi block of Dumka district, about 10 years ago. After coming in to the notice of the Government of Jharkhand, in view of the importance of antiquity and historicity of this fossil and the site, the concerned departments of the Government of Jharkhand have become active with immediate effect for the conservation and to develop the site as a tourist destination.

 

Eminent archaeologist Pandit Anoop Kumar Bajpai, who discovered this fossil of a giant fish contained in the rock of Mahabala mountain valley of Barmasia under Jarmundi block of Dumka district of Ang Pradesh region of eastern India, has told it to be more than 300 million years old.


In a conversation with Kundan Amitabh of Angika.com, archaeologist Mr. Bajpai told that a narrow river named Ghaghajor flows adjacent to this fossil rock found in Barmasia. That's why this fossil rock is also known as Ghaghajor rock.

 

It is well known that archaeologist Pandit Anoop Kumar Bajpai has already discovered squirrels, deer hoofs, ancient human footprints etc. contained in the rocks of this area in the form of fossils. Jharkhand government is also aware of Mr. Bajpai's important discoveries.

 

Archaeologist Pandit Bajpai told that according to the belief established in the books of Geography and Geology, the hills of Santalpargana are known as the hill of Rajmahal. Earlier the mountains of Africa used to be embodied with these hills. At that time the terrestrial parts of the earth were very small. According to the German geologist Alfred Wegener, 300 million years ago the mountains of Africa separated away from the Rajmahal hill. That's why even today the nature of the fossils found in the Rajmahal and the hills of Africa is found to be similar.

 

According to Mr. Bajpai, if all these places of Anga region are protected and developed as tourist places, then researchers and tourists from all over the world will be able to come here. Because at these places the remains of the signs of gradual development of the living beings of the earth are seen. It is worth mentioning that Pandit Anoop Kumar Bajpai has achieved an important position in the field of archaeologist and has discovered fossils of all flora and fauna in this area in the past.


Angika Version | Hindi Version | English Version

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