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कागजे पॆ सिमटलॊ छै गंगा कार्ययोजना

भागलपुर(Mar 19,2008). प्रदूषण केरॊ वजह सें गंगा केरॊ स्व शुद्धिकरण के क्षमता तेजी सॆं हेरैलॊ जाय रहलॊ छै. गंगा के प्रदूषण के सबसे बड़ॊ कारण बगैर उपचारित करलॊ शहर के नाला सें निकलै वाला कचरा आरू मल-मूत्र कॆ गंगा में बहाना छै. एकरा सॆं गंगा केरॊ पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह प्रभावित होलॊ छै. हालांकि वर्ष 1988 मॆं गंगा कार्ययोजना के तहत भागलपुर में 7 करोड़ 87 लाख रुपये सें काम शुरू करलॊ गेलॊ रहै. पैसा तॆ खर्च होलै लेकिन अदूरदर्शिता के कारण बर्बादे चल्लॊ गेलै. फिलहाल गंगा कार्ययोजना से जुड़लॊ सभ योजना भागलपुर में मृतप्रायः छै.

गंगा जल में 350 सें 400 तक के शैवाल के किस्म मिलै छै, जे तेजी सें कम होलॊ जाय रहलॊ छै. शैवाल काफी हद तक गंगा कॆ स्व शुद्धिकरण मॆं सहायता प्रदान करै छै. हद से ज्यादा गंदगी गंगा में समाहित होला सें शैवाल तेजी सें कम होय रहलॊ छै. मछलियॊ के भोजन यहॆ शैवाल छेकै. प्रदूषण के अधिकता सॆं शैवाल आरू मछली गंगा में तेजी से खत्म होय रहलॊ छै. एनटीपीसी कहलगांव सें निकलै वाला गर्म पानी आरू छारॊ सें गंगा के स्थिति आरू नारकीय होय गेलॊ छै. एकरॊ अतिरिक्त गंगा में बहैलॊगेलॊ अधजला लाश आरू चिता के राख भी गंगा के शुद्धता कॆ नष्ट करी रहलॊ छै. एगॊ अनुमान के मुताबिक भागलपुर, सुल्तानगंज आरू कहलगांव केरॊ श्मशान घाटॊ पर रोजाना 50 सें 60 लाश जलै छै. साधु-सन्यासी, कोढ़ी, अज्ञात लोगॊ के लाश जे बहैलॊ जाय छै, वू संख्या एकरा मॆं शामिल नै छै. एकरॊ अतिरिक्त कारखाना सब के कचरा, नाला के गंदगी, मलमूत्र, खेतॊ मॆं प्रयोग करलॊ जानय वाला कीटनाशक भी गंगा के पानी कॆ जहरीला बनाय रहलॊ छै. पानी का गंदलापन सामान्य पानी के तुलना मॆं तीन सें दस गुणा ज्यादा होय गेलॊ छै. सबसें ज्यादा असर पानी में घुललॊ आक्सीजन के स्तर पर पड़लॊ छौ. ध्यान दै योग्य बात इ छै कि भागलपुर शहर के एगॊ बड़ॊ आबादी कॆ नगर निगम पीयै लेली गंगा जल उपलब्ध कराबै छै. वैज्ञानिकॊ के अनुसार पानी मॆं 'पेसियल कैलिफार्म' नामक जीवाणु 100 घन मीटर मॆं 500 सें ज्यादा संख्या में हो जाय तॆ इ मनुष्य लेली अनुपयोगी आरू घातक होय जाय छै , जबकि गंगा मॆं इ जीवाणु के संख्या प्रति 100 घनमीटर पानी मॆं 1000 सें ज्यादा होय गेलॊ छै. .

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